बिहार के दक्षिण हिस्से में गर्मी से लोग बेहाल वही उत्तरी हिस्से मे बारिश होते ही गर्मी से राहत।
बिहार में मानसून ने दस्तक तो दे दी है, लेकिन आसमान से राहत की बूंदें अभी भी लाखों लोगों की पहुंच से दूर हैं। राजधानी पटना समेत दक्षिण और दक्षिण-मध्य बिहार के कई जिलों में लोग भीषण गर्मी, उमस और लू की दोहरी मार झेल रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि सुबह से लेकर देर शाम तक सड़कों पर सन्नाटा पसरा दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर उत्तर और पूर्वोत्तर बिहार में मानसूनी गतिविधियां तेज होने से मौसम का मिजाज बदलने लगा है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे को बेहद अहम बताते हुए अलर्ट जारी किया है। इस बीच किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं और आम लोग गर्मी से राहत की एक-एक बूंद का इंतजार कर रहे हैं।
बिहार में मौसम का दोहरा चेहरा
इस समय बिहार दो अलग-अलग मौसमों का अनुभव कर रहा है। एक तरफ पटना, गया, औरंगाबाद, नवादा, रोहतास और आसपास के जिलों में तापमान और उमस ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। दोपहर के समय सड़कें लगभग खाली दिखाई दे रही हैं। बाजारों में भी लोगों की आवाजाही कम हो गई है।
वहीं दूसरी तरफ पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, अररिया और सीमांचल के कई हिस्सों में बादलों की आवाजाही बढ़ी है। यहां हल्की बारिश और ठंडी हवाओं के कारण लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली है। मौसम के इस असमान व्यवहार ने पूरे राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया है।
खेतों में बढ़ी किसानों की चिंता
मानसून की सुस्ती का सबसे बड़ा असर खेती-किसानी पर दिखाई दे रहा है। धान की रोपनी का समय शुरू हो चुका है, लेकिन बारिश नहीं होने से कई जिलों में खेत सूखे पड़े हैं। किसान परेशान हैं कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो खेती का पूरा चक्र प्रभावित हो सकता है।
पटना जिले के एक किसान रामविलास यादव कहते हैं, "हम लोग कई दिनों से बारिश का इंतजार कर रहे हैं। खेत तैयार हैं लेकिन पानी नहीं है। अगर अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो नुकसान बढ़ जाएगा।"
गया और नवादा के किसानों ने भी चिंता जताई है कि डीजल पंप के सहारे सिंचाई करना महंगा पड़ रहा है। ऐसे में मानसून की देरी खेती की लागत को बढ़ा रही है।
भीषण गर्मी ने लोगों का हाल किया बेहाल
राजधानी पटना में उमस भरी गर्मी ने लोगों को घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया है। बिजली की बढ़ती खपत के कारण कई इलाकों में ट्रांसफॉर्मरों पर दबाव बढ़ गया है। अस्पतालों में भी गर्मी से संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।
दोपहर के समय बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और बाजारों में लोगों को पसीने से तर-बतर देखा गया। कई जगहों पर पेयजल की मांग बढ़ गई है। बच्चे, बुजुर्ग और मजदूर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित नजर आ रहे हैं।
स्थानीय निवासी सुनीता देवी बताती हैं, "दिन में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। गर्म हवा और उमस से सांस लेने में तकलीफ महसूस हो रही है।"
मौसम विभाग का 48 घंटे का अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-मध्य बिहार में अगले 48 घंटे तक हीटवेव जैसी स्थिति बनी रह सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून राज्य के कुछ हिस्सों में पहुंच चुका है, लेकिन उसकी सक्रियता अभी पूरी तरह नहीं बढ़ी है।
विशेषज्ञों के अनुसार 27 जून के बाद मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और राज्य के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है।
मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी है।
आकाशीय बिजली और तेज हवाओं का खतरा
गर्मी के बीच मौसम विभाग ने मेघगर्जन, तेज हवाएं और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की है। कई जिलों में बादल बनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे अचानक मौसम बदल सकता है।
आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। स्थानीय प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में माइकिंग के जरिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसानों से कहा गया है कि खराब मौसम के दौरान खुले खेतों और पेड़ों के नीचे शरण न लें।
प्रशासन की तैयारी तेज
संभावित खराब मौसम को देखते हुए जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन टीमों को सक्रिय कर दिया है। कई जिलों में कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। बिजली गिरने और तेज आंधी की स्थिति से निपटने के लिए आपदा राहत दलों को तैयार रखा गया है।
अधिकारियों का कहना है कि मौसम से जुड़ी हर स्थिति पर नजर रखी जा रही है। ग्रामीण इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाई जा सके।
लोगों को राहत का इंतजार
बिहार के लाखों लोगों की निगाहें अब आसमान पर टिकी हुई हैं। हर गुजरते दिन के साथ गर्मी और उमस का असर बढ़ता जा रहा है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि मानसून जल्द पूरी तरह सक्रिय होगा और झमाझम बारिश के साथ राहत लेकर आएगा।
बाजारों, चौक-चौराहों और गांवों में मानसून की चर्चा सबसे बड़ा विषय बनी हुई है। किसान, मजदूर, व्यापारी और आम नागरिक सभी एक ही सवाल पूछ रहे हैं— आखिर बारिश कब होगी?
स्थानीय लोगों की मांग और बड़ा सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि मौसम की बदलती परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन को पेयजल, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था करनी चाहिए। किसानों ने सरकार से सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था और आर्थिक सहायता की मांग भी की है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर मानसून की रफ्तार फिर धीमी पड़ गई तो खेती और आम जनजीवन पर इसका क्या असर होगा? विशेषज्ञ भी मानते हैं कि मौसम के बदलते पैटर्न भविष्य में बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
फिलहाल बिहार एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां एक तरफ आसमान में मानसून के बादल दिखाई दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ धरती अब भी तप रही है। लाखों लोगों की उम्मीदें अगले 48 घंटों पर टिकी हैं। अब सबकी नजरें आसमान पर हैं, क्योंकि बारिश की पहली जोरदार फुहार ही इस भीषण गर्मी, किसानों की चिंता और लोगों की बेचैनी को खत्म कर सकती है।

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