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भरत तिवारी एनकाउंटर केस में बड़ा मोड़, 11 आरोपियों को लेकर कोर्ट में सुनवाई

भरत तिवारी एनकाउंटर केस में कोर्ट का बड़ा आदेश, 11 आरोपियों को लेकर सुनवाई में आया नया मोड़

आरा | सोमवार, 10 अगस्त 2026 | रिपोर्ट: खबर जंक्शन बिहार

बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सोमवार को आरा सीजेएम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। भरत तिवारी की मौत को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में पीड़ित परिवार की ओर से अदालत के सामने कई बिंदु रखे गए। सुनवाई के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी और अदालत में पेशी को लेकर बड़ा दावा सामने आया, लेकिन बाद में कोर्ट की ओर से गैर-जमानती वारंट जारी होने की बात से अलग जानकारी सामने आने के बाद मामले में स्थिति और महत्वपूर्ण हो गई है।


भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर पिछले कई सप्ताह से बिहार में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा जारी है। परिवार की ओर से इसे कथित फर्जी एनकाउंटर बताया जाता रहा है, जबकि मामले की वास्तविक स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए तय होनी है।


कोर्ट में 11 बिंदुओं पर रखी गई बात

भरत तिवारी के परिवार की ओर से अधिवक्ता डॉ. संजीव कुमार सिंह ने सोमवार को आरा सिविल कोर्ट में मामले से जुड़े 11 बिंदुओं पर अपना पक्ष रखा।


वकील की ओर से अब तक हुई कार्रवाई, जांच रिपोर्ट और प्राथमिकी में नामजद आरोपियों से जुड़े तथ्यों को अदालत के सामने रखने की बात कही गई है।


सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से अब तक की जांच से संबंधित जानकारी और अपडेट मांगे जाने की बात सामने आई है।

गैर-जमानती वारंट को लेकर क्या हुआ?


इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा अदालत के आदेश को लेकर हुई। पीड़ित पक्ष के वकील की ओर से दावा किया गया कि भरत तिवारी एनकाउंटर में नामजद 11 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है और सभी को गिरफ्तार कर 12 अगस्त तक अदालत में पेश करने का आदेश दिया गया है।


वकील के अनुसार, आरोपियों में तत्कालीन जगदीशपुर एसडीएम संजीत कुमार, तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा और शाहपुर थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत कई पुलिस अधिकारी और कर्मी शामिल हैं।


हालांकि, सुनवाई के बाद कोर्ट की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि इन 11 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी नहीं किया गया है। कोर्ट की ओर से यह भी कहा गया कि वकील ने 11 बिंदुओं पर अपना पक्ष रखा था और उन पर अपडेट मांगा गया है।


यही विरोधाभासी जानकारी अब इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू बन गई है।


किन लोगों के नाम सामने आए?

वकील की ओर से बताए गए विवरण में तत्कालीन जगदीशपुर एसडीएम संजीत कुमार, तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा और शाहपुर थाना के तत्कालीन एसएचओ राजेश मालाकार के नाम शामिल हैं।


इसके अलावा सब-इंस्पेक्टर अंकित आर्यन, हरिश्चंद्र कुमार, एएसआई रमाशंकर यादव और एसटीएफ कर्मियों विकास कुमार, रविंदर, रामचंद्र और अक्षय कुमार के नाम भी बताए गए हैं।


इन सभी के खिलाफ मामले में आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होगा।


एसटीएफ जवान अक्षय कुमार पहले गिरफ्तार


भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एसटीएफ के जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बिहार पुलिस ने 31 जुलाई को अक्षय कुमार को गिरफ्तार किया था।


मामले से जुड़े आरोपों में यह भी कहा गया है कि भरत तिवारी पर पहली गोली अक्षय कुमार ने चलाई थी। हालांकि, यह आरोप जांच का विषय है और इसे अदालत द्वारा अंतिम रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।


17 जून को हुई थी भरत तिवारी की मौत


भरत तिवारी की उम्र 28 वर्ष बताई गई थी। उनकी मौत 17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत उनके गांव में हुई कथित मुठभेड़ के दौरान हुई थी।


घटना के बाद उनके परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए और इसे कथित फर्जी एनकाउंटर बताया। परिवार लगातार निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग करता रहा है।


मामला धीरे-धीरे इतना बड़ा हो गया कि बिहार की राजनीति में भी इसकी चर्चा होने लगी।


राजनीतिक गलियारों में भी उठा मामला


भरत तिवारी मामले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई नेताओं ने सवाल उठाए हैं। एनडीए में शामिल चिराग पासवान समेत कई नेताओं के परिवार से मिलने की बात सामने आई है।


हाल ही में बांकीपुर विधानसभा सीट से जीते प्रशांत किशोर ने भी भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की थी।


मामले को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट का रुख किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में यह मामला सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बिहार की राजनीति और कानून-व्यवस्था की बहस का हिस्सा बन गया है।


अब जांच पर टिकी सबकी नजर

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण जांच रिपोर्ट और अदालत की अगली कार्रवाई होगी। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों, पुलिस कार्रवाई, पोस्टमार्टम और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।


सोमवार की सुनवाई के बाद गैर-जमानती वारंट को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने से स्थिति और महत्वपूर्ण हो गई है। इसलिए इस मामले में अदालत के आधिकारिक आदेश और आगे की न्यायिक कार्रवाई को ही अंतिम आधार माना जाना चाहिए।

फिलहाल भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है। परिवार न्याय की मांग कर रहा है और अदालत के सामने मामले से जुड़े तथ्य रखे जा रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे किस दिशा में जाती है और अदालत इस मामले में आगे क्या आदेश देती है।

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में आपके अनुसार निष्पक्ष जांच के लिए किन पहलुओं की सबसे गहराई से जांच होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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