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बिहार में पुलिस अधिकारियों को मिली मजिस्ट्रेट की शक्ति, जानें नया नियम

बिहार में पुलिस अधिकारियों को मिली मजिस्ट्रेट की ताकत, त्योहारों में अब होंगे खास अधिकार

पटना | मंगलवार, 11 अगस्त 2026 | रिपोर्ट: खबर जंक्शन बिहार

बिहार में त्योहारों और बड़े जुलूसों के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। गृह विभाग ने कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां प्रदान की हैं। यानी अब तय स्तर के पुलिस अधिकारी केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत विशेष दंडाधिकारी शक्तियों का इस्तेमाल करने का अधिकार भी मिलेगा।


बिहार गृह विभाग ने आईजी, डीआईजी, एसपी समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां दी हैं।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बिहार में अलग-अलग त्योहारों, मेलों और धार्मिक जुलूसों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटती है। ऐसे आयोजनों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती होती है। नई व्यवस्था के तहत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को मौके पर स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त अधिकार मिलेंगे।


किसे मिली विशेष शक्ति?

गृह विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां दी गई हैं। इनमें आईजी, डीआईजी, एसएसपी, एसपी, अपर एसपी, ग्रामीण एसपी और नगर एसपी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इन अधिकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 125 से 143 के तहत यह शक्ति प्रदान की गई है। इसका उद्देश्य त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान विधि-व्यवस्था को प्रभावी तरीके से बनाए रखना है।


इलाके में सीधे काम आएगी व्यवस्था

यह विशेष व्यवस्था संबंधित पुलिस क्षेत्र और प्रक्षेत्र में लागू होगी। हालांकि, रेल पुलिस जिला इस व्यवस्था से बाहर रहेगा। इसका मतलब यह है कि जिन पुलिस अधिकारियों को यह विशेष शक्ति दी गई है, वे अपने संबंधित क्षेत्र में कानून-व्यवस्था से जुड़ी परिस्थितियों के दौरान इन अधिकारों का इस्तेमाल कर सकेंगे।

लेकिन असली महत्व तब सामने आएगा, जब किसी बड़े त्योहार या जुलूस के दौरान अचानक स्थिति संवेदनशील हो जाए। ऐसी परिस्थितियों में प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर तत्काल समन्वय बेहद जरूरी होता है।


त्योहारों में क्यों जरूरी मानी जा रही है यह व्यवस्था?

बिहार में पूरे साल कई बड़े धार्मिक और सामाजिक आयोजन होते हैं। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और आम लोग शामिल होते हैं। सरस्वती पूजा, होली, रामनवमी, दुर्गापूजा, दीपावली, ईद, मुहर्रम और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों के अलावा विभिन्न मेले और जुलूस भी आयोजित किए जाते हैं।

इन मौकों पर भीड़ प्रबंधन, जुलूस की व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी होती है। सरकार की नई व्यवस्था इसी जिम्मेदारी को और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


पुलिस अधिकारियों की भूमिका होगी अहम

आईजी और डीआईजी जैसे वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर एसएसपी, एसपी और अन्य संबंधित स्तर के अधिकारियों को यह विशेष शक्ति मिलने के बाद उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी।

त्योहारों के दौरान किसी इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके की परिस्थितियों के अनुसार उपलब्ध कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकेंगे।

इससे पुलिस और प्रशासन के बीच समन्वय को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।


जुलूस और मेलों पर रहेगी खास नजर

धार्मिक जुलूस और बड़े मेले अक्सर संवेदनशील परिस्थितियों से जुड़े होते हैं। ऐसे आयोजनों में भीड़ अधिक होने के कारण प्रशासन को लगातार निगरानी रखनी पड़ती है। नई व्यवस्था के तहत संबंधित पुलिस अधिकारियों को विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्ति मिलने से ऐसे आयोजनों के दौरान उनकी प्रशासनिक भूमिका मजबूत होगी। खास तौर पर रामनवमी, मुहर्रम, दुर्गापूजा और छठ जैसे बड़े आयोजनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी काफी बढ़ जाती है।


रेल पुलिस जिला रहेगा बाहर

गृह विभाग की ओर से जारी व्यवस्था में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह प्रावधान रेल पुलिस जिले को छोड़कर संबंधित पुलिस क्षेत्र और प्रक्षेत्र में लागू होगा। इसका अर्थ है कि रेलवे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों के लिए यह व्यवस्था उसी रूप में लागू नहीं होगी।


अब नजर रहेगी इसके इस्तेमाल पर

सरकार के इस फैसले के बाद अब इन विशेष शक्तियों के प्रभावी इस्तेमाल पर नजर रहेगी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दंडाधिकारी की शक्तियां मिलने से त्योहारों और जुलूसों के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।

सरकार का उद्देश्य त्योहारों, मेलों और जुलूसों के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 125 से 143 के तहत दी गई यह शक्ति संबंधित पुलिस अधिकारियों को उनके क्षेत्र में अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकार उपलब्ध कराएगी।

बिहार में त्योहारों का मौसम आते ही बड़ी संख्या में आयोजन होते हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई व्यवस्था जमीन पर कानून-व्यवस्था संभालने में कितनी प्रभावी साबित होती है।

आपको क्या लगता है, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्ति मिलने से बिहार में त्योहारों और जुलूसों के दौरान कानून-व्यवस्था बेहतर होगी? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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