युवक के शव को राज्य राजमार्ग एसएच-106 पर रखकर सड़क किया जाम
बख्तियारपुर के घोसवरी गांव में गुरुवार की सुबह उस वक्त माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया जब 20 वर्षीय युवक रंजन कुमार की मौत को लेकर परिजनों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। देखते ही देखते आक्रोशित ग्रामीणों ने युवक के शव को राज्य राजमार्ग एसएच-106 पर रखकर सड़क जाम कर दिया। परिजनों का आरोप था कि रंजन की मौत कोई सड़क हादसा नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या का परिणाम है। सड़क पर शव रखे जाने के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और करीब तीन घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा।
घटना की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचने लगे। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। लोगों के चेहरों पर गुस्सा, दर्द और न्याय की मांग साफ दिखाई दे रही थी। पूरे इलाके में सिर्फ एक ही चर्चा थी— आखिर रंजन कुमार की मौत कैसे हुई?
रात में सड़क किनारे मिला था गंभीर हालत में
लेकिन अस्पताल पहुंचने तक काफी देर हो चुकी थी। ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। जैसे ही यह खबर परिजनों तक पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया। मां की चीख-पुकार और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
सुबह होते ही सड़क पर उतर आए ग्रामीण
परिजनों का आरोप था कि रंजन एक ईंट-भट्ठे पर काम करता था और हाल के दिनों में कुछ लोगों से उसका विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते उसकी हत्या किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान कई ग्रामीणों ने कहा कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होगी, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे। सड़क पर नारेबाजी होती रही और प्रशासन के खिलाफ लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता गया।
घटनास्थल पर दिखा तनाव और भारी भीड़
घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार माहौल बेहद भावुक और तनावपूर्ण था। मृतक के परिजन बार-बार न्याय की मांग कर रहे थे। महिलाओं की चीखें और परिजनों का विलाप वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर रहा था।
एक ग्रामीण ने कहा, "रंजन बेहद मेहनती लड़का था। वह परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए ईंट-भट्ठे पर काम करता था। उसकी मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है।"
पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही बख्तियारपुर थाना पुलिस हरकत में आ गई। थानाध्यक्ष देवानंद शर्मा, अंचलाधिकारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों और ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया।
लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती भी की गई। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
करीब तीन घंटे तक प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बातचीत का दौर चलता रहा। इस दौरान अधिकारियों ने हर पहलू की जांच कराने का आश्वासन दिया।
विधायक ने फोन पर दिया भरोसा
मामले की गंभीरता को देखते हुए बख्तियारपुर विधायक अरुण कुमार शाह ने भी पीड़ित परिवार से संपर्क किया। उस समय वह बिहार से बाहर थे, लेकिन उन्होंने फोन पर परिजनों से बात कर संवेदना व्यक्त की।
विधायक ने आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। साथ ही उन्होंने सरकारी प्रावधानों के तहत मिलने वाली सहायता राशि दिलाने का भी भरोसा दिया।
विधायक के आश्वासन और प्रशासन की पहल के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी।
तीन घंटे बाद खुला जाम
करीब तीन घंटे तक प्रभावित रहा आवागमन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा। हालांकि इलाके में अब भी लोगों के बीच चर्चा का विषय रंजन कुमार की मौत ही बनी हुई है।
पुलिस ने शुरू की जांच
बख्तियारपुर थानाध्यक्ष देवानंद शर्मा ने बताया कि मृतक के परिजनों की ओर से लिखित आवेदन प्राप्त हुआ है, जिसमें हत्या का आरोप लगाया गया है। आवेदन के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
उन्होंने कहा कि पुलिस हर पहलू पर गंभीरता से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और अन्य तकनीकी तथ्यों के आधार पर मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी।
गांव में मातम, लोगों की एक ही मांग
रंजन कुमार की मौत के बाद घोसवरी गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। परिवार के लोग अब भी सदमे में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह हत्या का मामला है तो दोषियों की जल्द गिरफ्तारी होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए। वहीं कई ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि आखिर एक युवक गंभीर हालत में सड़क किनारे कैसे पहुंचा और उसके साथ वास्तव में क्या हुआ?
फिलहाल पूरे इलाके की नजर पुलिस जांच पर टिकी हुई है। रंजन कुमार की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब का इंतजार सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा गांव कर रहा है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में मौत के पीछे का सच क्या सामने आता है और क्या पीड़ित परिवार को वह न्याय मिल पाता है जिसकी मांग लेकर गुरुवार सुबह हजारों लोगों का गुस्सा सड़क पर उतर आया था।



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