11 अगस्त 1942: पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने निकले सात छात्र शहीद हुए
पटना | मंगलवार, 11 अगस्त 2026 | रिपोर्ट: खबर जंक्शन बिहार
आज का दिन बिहार के इतिहास में शौर्य, बलिदान और देशभक्ति की ऐसी कहानी याद दिलाता है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। 11 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने निकले सात युवा छात्रों पर अंग्रेजी पुलिस ने गोलियां चला दी थीं। गोलीबारी में सात छात्र शहीद हो गए, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा। बलिदानियों के सामूहिक प्रयास से सचिवालय के गुंबद पर तिरंगा फहराया गया और यह घटना बिहार के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमर हो गई।
अगस्त क्रांति के दौरान उमड़ा देशभक्ति का जज्बा
वर्ष 1942 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन ने पूरे देश में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन की नई लहर पैदा कर दी थी। बिहार में भी इस आंदोलन का व्यापक असर देखने को मिला।
पटना में उस समय छात्र भी आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे थे। 11 अगस्त को छात्रों का एक समूह पटना सचिवालय की ओर तिरंगा लेकर बढ़ा। उनका उद्देश्य अंग्रेजी शासन के प्रतीक माने जाने वाले सचिवालय भवन पर भारतीय झंडा फहराना था।
लेकिन अंग्रेजी हुकूमत के लिए यह चुनौती थी। छात्रों को रोकने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया।
अंग्रेजी पुलिस ने बरसाईं गोलियां
इतिहास के इस निर्णायक मोड़ पर पटना के तत्कालीन जिलाधिकारी डब्ल्यू. जी. आर्थर के आदेश पर पुलिस ने छात्रों पर गोली चला दी। गोलीबारी में कई छात्र घायल हुए और सात युवा शहीद हो गए। ये वे छात्र थे, जिन्होंने अपनी उम्र की परवाह किए बिना देश की आजादी के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।
सात छात्रों का अमर बलिदान
11 अगस्त 1942 को शहीद हुए सात छात्रों में उमाकांत प्रसाद सिंह, रामानंद सिंह, सतीश प्रसाद झा, जगपति कुमार, देवीपद चौधरी, राजेंद्र सिंह और राम गोविंद सिंह शामिल थे। ये सभी उस समय छात्र थे। इनके सामने अपना भविष्य था, पढ़ाई थी और जिंदगी के तमाम सपने थे। लेकिन देश की आजादी का सपना इन निजी सपनों से कहीं बड़ा था। उन्होंने अंग्रेजी शासन के सामने झुकने के बजाय अपने प्राणों की आहुति देना स्वीकार किया।
गोली लगी, लेकिन कदम नहीं रुके
इस घटना की सबसे प्रेरणादायक बात यह रही कि अंग्रेजी पुलिस की गोलियों के बावजूद छात्रों का हौसला टूट नहीं गया। बलिदानियों और उनके साथियों ने अपने सामूहिक प्रयास से पटना सचिवालय के गुंबद पर तिरंगा फहरा दिया। यह सिर्फ एक झंडा फहराने की घटना नहीं थी, बल्कि अंग्रेजी हुकूमत के सामने भारतीय युवाओं के अदम्य साहस और संकल्प का प्रतीक बन गई। जिसका अंदाजा अंग्रेजी हुकूमत ने शायद नहीं लगाया था, वह था इन छात्रों का देश के लिए मर मिटने का जज्बा।
बिहार के इतिहास में अमर हुआ 11 अगस्त
11 अगस्त का दिन बिहार के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने के लिए छात्रों का यह बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गया।
इन सात युवाओं ने यह दिखा दिया कि आजादी केवल बड़े नेताओं के संघर्ष से नहीं मिली, बल्कि हजारों-लाखों आम भारतीयों, युवाओं और छात्रों ने भी इसके लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाया था।
आजादी की कीमत याद दिलाता है यह दिन
आज जब देश आजाद है और हम बिना किसी रोक-टोक के तिरंगा फहराते हैं, तब 11 अगस्त 1942 की घटना हमें उस दौर की कठिनाइयों और बलिदानों की याद दिलाती है। आज के युवाओं के लिए भी इन शहीद छात्रों की कहानी एक बड़ी सीख है। जिस उम्र में वे अपने भविष्य के सपने देख रहे थे, उसी उम्र में उन्होंने देश के भविष्य के लिए अपना वर्तमान कुर्बान कर दिया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हम उन बलिदानियों को केवल स्मृति दिवस पर याद करेंगे, या उनके त्याग और देशभक्ति को अपने जीवन में भी सम्मान देंगे?
शहीदों को कोटि-कोटि नमन
11 अगस्त 1942 के उन सात अमर शहीद छात्रों को आज पूरा बिहार श्रद्धा से याद करता है। उमाकांत प्रसाद सिंह, रामानंद सिंह, सतीश प्रसाद झा, जगपति कुमार, देवीपद चौधरी, राजेंद्र सिंह और राम गोविंद सिंह का बलिदान स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा। उनका त्याग हमें याद दिलाता है कि तिरंगे की आन, बान और शान के लिए देश के अनगिनत वीरों ने अपना जीवन न्योछावर किया था।
इन महान बलिदानियों को कोटि-कोटि प्रणाम और विनम्र श्रद्धांजलि।
आप 11 अगस्त 1942 के इन सात छात्र शहीदों के बलिदान के बारे में क्या सोचते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
11 अगस्त 1942: पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने वाले सात छात्र शहीद, 11 अगस्त 1942 को पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने निकले सात छात्र अंग्रेजी पुलिस की गोलीबारी में शहीद हुए। जानिए उनके अमर बलिदान की पूरी कहानी।
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11 अगस्त 1942 को पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने निकले सात छात्र अंग्रेजी पुलिस की गोलीबारी में शहीद हो गए। गोली लगी, लेकिन हौसला नहीं टूटा और सचिवालय के गुंबद पर तिरंगा फहराया गया। उन अमर बलिदानियों को कोटि-कोटि नमन।
11 अगस्त के 7 अमर शहीद

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