एसडीपीओ के नेतृत्व में देर रात दबिश, सरकारी काम में बाधा और जब्त बाइक छुड़ाने के मामले में अधिवक्ता प्रमोद सिंह गिरफ्तार...
बाढ़ अनुमंडल के पंचमहला थाना क्षेत्र में लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहे अधिवक्ता प्रमोद सिंह को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गुरुवार देर शाम एसडीपीओ रामकृष्णा के नेतृत्व में कई थानों की संयुक्त पुलिस टीम ने नौरंगा जलालपुर गांव स्थित उनके आवास पर छापेमारी की और उन्हें हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी की खबर फैलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए, जबकि पुलिस ने पूरे अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा किया। इस कार्रवाई को हाल के दिनों में बाढ़ अनुमंडल की सबसे अहम पुलिस कार्रवाई माना जा रहा है।
एसडीपीओ की बैठक के बाद बनी गिरफ्तारी की रणनीति
जानकारी के अनुसार, गुरुवार को हाथीदह थाना परिसर में सर्किल इंस्पेक्टर राजीव कुमार तथा सर्किल के सभी थानाध्यक्षों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता एसडीपीओ रामकृष्णा ने की। कानून-व्यवस्था और लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक समाप्त होने के तुरंत बाद एसडीपीओ ने संयुक्त पुलिस टीम के साथ पंचमहला थाना क्षेत्र का रुख किया। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि लंबे समय से फरार चल रहे अधिवक्ता प्रमोद सिंह अपने घर पर मौजूद हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने बिना देर किए नौरंगा जलालपुर स्थित उनके आवास पर दबिश दी और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
कौन हैं प्रमोद सिंह और क्या है मामला?
गिरफ्तार अधिवक्ता प्रमोद सिंह, सोनू-मोनू के पिता बताए जाते हैं और वे पंचमहला थाना कांड संख्या 27/2026 में नामजद आरोपी हैं। पुलिस के अनुसार, उन पर सरकारी कार्य में बाधा डालने तथा पुलिस द्वारा जब्त की गई एक मोटरसाइकिल को 15 से 20 लोगों के साथ मिलकर जबरन छुड़ाने का आरोप है।
पुलिस का दावा है कि जब्त मोटरसाइकिल उनके घर के पास से बरामद हुई थी। घटना के बाद से प्रमोद सिंह लगातार फरार चल रहे थे और पुलिस उनकी तलाश में कई दिनों से छापेमारी कर रही थी।
संयुक्त पुलिस टीम ने की कार्रवाई
इस कार्रवाई में एसडीपीओ रामकृष्णा के अलावा सर्किल इंस्पेक्टर राजीव कुमार, मरांची थानाध्यक्ष रौशन कुमार, हाथीदह थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार सिंह, मोकामा थानाध्यक्ष कुणाल कुमार, पंचमहला थानाध्यक्ष बिनोद कुमार सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल शामिल रहा।
पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर सुनियोजित तरीके से कार्रवाई की, जिससे किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।
पहले भी चर्चा में आया था मामला
यह मामला पहले भी काफी चर्चा में रहा था। पुलिस 23 मई को भी प्रमोद सिंह के घर पहुंची थी। उस दौरान पुलिस चेकिंग और कार्रवाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और कार्रवाई करते हुए दो थानाध्यक्षों को निलंबित कर दिया था।
उस घटना के बाद यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ था। अब मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इसे अपनी बड़ी सफलता मान रही है।
इलाके में रही हलचल, लोग करते रहे चर्चा
गिरफ्तारी के दौरान गांव में काफी हलचल देखने को मिली। पुलिस वाहनों के पहुंचते ही आसपास के लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। कुछ लोग पूरी कार्रवाई को दूर से देखते रहे तो कई लोग आपस में इस मामले को लेकर चर्चा करते नजर आए। पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र में पर्याप्त बल की तैनाती की थी।
पुलिस आगे की जांच में जुटी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि जब्त मोटरसाइकिल को छुड़ाने की घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका क्या थी। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
कानून से ऊपर कोई नहीं
प्रमोद सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने और कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। लंबे समय से फरार आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा तेज है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि पुलिस इस पूरे मामले में आगे क्या कदम उठाती है और अन्य आरोपियों पर क्या कार्रवाई होती है।
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