बिहार में भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार, समस्तीपुर में 1 लाख की रिश्वत लेते अस्पताल का लिपिक गिरफ्तार, निगरानी की 50वीं कार्रवाई
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| गिरफ्तार लिपिक अनिल राम |
रोसड़ा अनुमंडलीय अस्पताल का लिपिक एक लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार।
बकाया वेतन और पेंशन कार्य के बदले मांगी थी मोटी रकम।
समस्तीपुर/पटना : बिहार में भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो का अभियान तेज गति से जारी है। इसी कड़ी में आज, 30 अप्रैल 2026 को ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने समस्तीपुर जिले के रोसड़ा में बड़ी कार्रवाई करते हुए अनुमंडलीय अस्पताल के लिपिक (क्लर्क) अनिल राम को एक लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
क्या है पूरा मामला?
शिवाजीनगर निवासी परिवादी देवेन्द्र मंडर ने निगरानी ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके बकाया वेतन और पेंशन संबंधी कार्यों के निष्पादन के लिए लिपिक अनिल राम द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है। परिवादी का लगभग 37 लाख रुपये का वेतन बकाया था, जिसे पास कराने के एवज में यह सौदेबाजी की गई थी। ब्यूरो ने शिकायत का सत्यापन कराया और आरोप सही पाए जाने पर डीएसपी संजय कुमार के नेतृत्व में एक धावादल का गठन किया।
सड़क पर हुई गिरफ्तारी
निगरानी की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया और जैसे ही अनिल राम ने रोसड़ा अनुमंडल चौक के पास मुख्य सड़क पर रिश्वत की राशि ली, टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को पूछताछ के लिए पटना लाया गया है, जिसके बाद उसे मुजफ्फरपुर स्थित विशेष निगरानी अदालत में पेश किया जाएगा।
निगरानी ब्यूरो का रिकॉर्ड
वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ यह ब्यूरो की 50वीं प्राथमिकी है। आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक 45 ट्रैप केस दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें कुल 43 अभियुक्तों की गिरफ्तारी हुई है। अब तक बरामद कुल रिश्वत की राशि 17,41,000 रुपये तक पहुँच गई है। ब्यूरो की इस कार्रवाई से सरकारी दफ्तरों में हड़कंप मचा हुआ है।

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