1 अणे मार्ग से विदाई! अब 7 सर्कुलर रोड होगा नीतीश कुमार का नया ठिकाना, पड़ोसी बने लालू यादव; जानें इस बंगले की 5 बड़ी खूबियां
पटना [29 अप्रैल 2026]: बिहार की राजनीति के सबसे बड़े केंद्र '1 अणे मार्ग' (CM हाउस) में पिछले 19 सालों से जारी एक युग का फिलहाल समापन हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार ने आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री आवास छोड़ दिया है। शनिवार को वह अपने नए पते 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट हो गए।
उनके साथ उनके बेटे निशांत कुमार भी इस नए आशियाने में रहेंगे। शिफ्ट होने के तुरंत बाद सियासी हलचल भी शुरू हो गई है; मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने नए आवास पहुंचकर नीतीश कुमार से मुलाकात की और मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा की।
भूकंप रोधी तकनीक और कोलकाता की घास: क्यों खास है 7 सर्कुलर रोड?
नीतीश कुमार ने इस बंगले को अपनी विशेष देखरेख में तैयार करवाया है। इसकी कुछ विशेषताएं इसे राज्य के सबसे आधुनिक बंगलों में से एक बनाती हैं:
भूकंप रोधी निर्माण: यह बंगला आधुनिक तकनीक से लैस है और बड़े भूकंप के झटकों को भी आसानी से सह सकता है।
कोलकाता का लॉन: बंगले के लॉन को एक मखमली और खास लुक देने के लिए घास विशेष रूप से कोलकाता से मंगवाकर लगाई गई है।
Z+ सुरक्षा: नए आवास की सुरक्षा की जिम्मेदारी Z+ श्रेणी के कमांडोज के पास है।
पड़ोसी बने लालू-नीतीश: बस 200 मीटर की दूरी
इस शिफ्टिंग की सबसे दिलचस्प बात यह है कि अब नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव पड़ोसी बन गए हैं। नीतीश कुमार का 7 सर्कुलर रोड वाला बंगला राबड़ी देवी के आवास (10 सर्कुलर रोड) से महज दो घर की दूरी पर है। दोनों घरों के बीच का फासला मात्र 200 मीटर है।
नीतीश कुमार और नंबर '7' का अनोखा कनेक्शन
नीतीश कुमार अपने जीवन में नंबर 7 को बेहद लकी मानते हैं। उनके राजनीतिक सफर में इस अंक का संयोग हैरान करने वाला है:
राजनीति की शुरुआत: 1977 में राजनीति के सफर का आगाज।
लोकदल अध्यक्ष: 1987 में युवा लोकदल के अध्यक्ष बने।
गाड़ी का नंबर: पहली बार CM बनने पर मिली गाड़ी का नंबर 777 था।
रेल मंत्री: केंद्र में रेल मंत्री रहते हुए उनके फोन का आखिरी नंबर 7 था।
7 निश्चय: बिहार के विकास के लिए उन्होंने '7 निश्चय' योजना शुरू की, जिसका अब पार्ट-3 चल रहा है।
20 साल में दूसरी बार छोड़ा CM हाउस
पिछले 20 सालों में यह दूसरी बार है जब नीतीश कुमार 1 अणे मार्ग छोड़कर बाहर निकले हैं। इससे पहले 2014 लोकसभा चुनाव में हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इस्तीफा दिया था और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया था। तब भी उन्होंने 8 महीने इसी 7 सर्कुलर रोड बंगले में बिताए थे।
क्या कहता है सरकारी नियम?
बिहार सरकार के गजट और भवन निर्माण विभाग के नियमों के अनुसार:
मंत्रियों को राजधानी में स्टाफ क्वार्टर, बगीचे, फ्री बिजली और पानी के साथ आवास मिलता है।
पद छोड़ने के 30 दिनों के भीतर आवास खाली करना अनिवार्य होता है।
नीतीश कुमार अब राज्यसभा सांसद के तौर पर नई भूमिका में हैं, ऐसे में 7 सर्कुलर रोड अब बिहार की राजनीति का नया 'पावर सेंटर' बनने जा रहा है।
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